Wednesday, September 30, 2020
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Religion
कोरोना काल में कैसे करें साधारण विधि से अपने घर में ही श्राद्ध बदलें दान का स्वरुप

यह पहली बार ही ऐसा होगा कि पितृ पक्ष में, इन दिनों तर्पण कराने के लिए कर्मकांडी उपलब्ध न हों, भोजन ग्रहण करने के लिए के लिए बहुत कम ब्राहम्ण हामी भरें और श्राद्ध कर्म में अपने नजदीकी संबंधी तक सम्मिलित न हों। हिंदू धर्म सदा से ही समय स्थान व स्थिति अनुसार ढाल लेता है इसी लिए सनातन कहलाता है।

इस विधि से बांधे राखी 

बहनें भाई को लाल रोली या केसर या कुमकुम से तिलक करें ज्योति से आरती उतारते हुए उसकी दीर्घायु की कामना करे और मिठाई खिलाए। और राखी बांधते हुए ईश्वर से उसकी लंबी आयु की और रक्षा की कामना करें । भाई उपहार स्वरुप बहन को शगुन या उपहार अवश्य दे। पुलिस, सैनिक बल तथा सैनिकों को भी रक्षार्थ राखी बांधी जाती है।

क्यों बांधें राखी ?

आधुनिक युग में भाई - बहन एक दूसरे की पूर्ण सुरक्षा का  भी ख्याल रखें । नारी सम्मान हो।  समाज में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों में कमी आएगी। भाई-बहन को स्नेहप्रेम ,कर्तव्य एवं दायित्व में बांधने वाला राखी का पर्व जब भाई का मुंह मीठा करा के और कलाई पर धागा बांध कर मनाया जाता है तो रिश्तों की खुशबू सदा के लिए बनी रहती है और संबंधों की डोर में मिठास का एहसास आजीवन परिलक्षित होता रहता है।

इस बार क्यों खास है रक्षाबंधन

सावन के अंतिम सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व कई शुभ योग व नक्षत्रों के संयोग में 3 अगस्त को मनाया जाएगा।29 साल बाद श्रावण पूर्णिमा पर सावन के अंतिम सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व कई शुभ योग व नक्षत्रों के संयोग में 3 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार भद्रा और ग्रहण का भी रक्षाबंधन पर कोई साया नहीं है।

3 अगस्त के  रक्षाबन्धन पर इस बार भद्रा काल  की बजाय कोरोना काल का साया

अक्सर राखी बांधने केमुहूर्त में हर बार ,भद्रा के समय को लेकर असमंजस बना रहता है परंतु इस बार राखीबांधने के लिए पूरा दिन है , भद्रा काल की बजाय कोरोना काल का ध्यान रखना होगा। जहां तक संभव हो, वीडियो कॉल आदि से संबंधियों से संपर्क करें।

हरियाली तीज का पौराणिक महत्व

हिंदू धर्म में हर व्रत, पर्व और त्यौहार का पौराणिक महत्व होता है और उससे जुड़ी कोई रोचक कहानी व कथा होती है। हरियाली तीज उत्सव को भी भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस कड़ी तपस्या और 108वें जन्म के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। कहा जाता है कि श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही भगवान शंकर ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

हरियाली तीज की तिथि व मुहूर्त

हरियाली तीज 2020

23 जुलाई

तृतीया तिथि - गुरुवार, 23 जुलाई 2020

तृतीया तिथि प्रारंभ - 19:21 बजे (22 जुलाई 2020 ) से

तृतीया तिथि समाप्त - 17:02 बजे (23 जुलाई 2020 ) तक

जानिए इस बार कितना पावन  है सावन

भारत में वसंत मास की तरह श्रावण मास का भी संपूर्ण जनमानस को बेसब्री से इंतजार रहता है जब चारों ओर मानसून के दौरान प्रकृति के साथ साथ तथा मानस पटल पर भी हरियाली छाने लगती है। श्रावण कृष्ण प्रतिपदा , 5 जुलाई की प्रातः 10 बजकर 15 मिनट पर आरंभ होकर सोमवार की सुबह 9ः 25 तक रहेगी, इसी लिए सावन का आरंभ 5 की बजाय 6 जुलाई से हो रहा है।

क्या देव भी पौराणिक काल में क्वारंटाइन होते थे?

हमारे देश में भगवान भी बीमार होते हैं और उनकी भी चिकित्सा की जाती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ को ठंडे जल से स्नान कराया जाता है। इस स्नान के बाद भगवान को ज्वर (बुखार) आ जाता है। 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ को एकांत में एक विशेष कक्ष में रखा जाता है। जहां केवल उनके वैद्य और निजी सेवक ही उनके दर्शन कर सकते हैं। इसे अनवसर कहा जाता है। देवताओं का यह 4 महीने का शयनकाल,वर्तमान समय का क्वारंटाइन जैसा ही लग रहा है।
हरिशयनी एकादशी, देवशयनी एकादशी, पद्मा एकादशी, पद्मनाभा एकादशी नाम से पुकारी जाने वाली एकादशी इस वर्ष 1 जुलाई  को आ रही है। इस दिन से गृहस्थ लोगों के लिए चातुर्मास नियम प्रारंभ हो जाते हैं।

कोरोना महामारी के बीच जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन

अहमदाबाद। प्राचीन शहर पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का प्रारंभ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कोरोना वायरस से फैली महामारी के चलते रथयात्रा पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में कुछ शर्तों के साथ इसकी अनुमति दे दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 500 से ज्यादा लोग रथ को नहीं खींच सकेंगे। सभी का कोरोना टेस्ट किया जाएगा और निगेटिव पाए जाने वालों को ही रथयात्रा में शामिल होने की अनुमति होगी। 

महाभारत में है काशी विश्वनाथ का वर्णन


काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास अनादि काल से माना जाता है। यहां तक कि कई उपनिषदों में और महाकाव्य 'महाभारत' में इसका वर्णन मिलता है। इसके ज्ञात इतिहास की बात करें तो मोहम्मद गौरी ने 1194 ईस्वी में इस को ध्वस्त करने की नापाक कोशिश की थी। इतना ही नहीं 1447 ईस्वी में जौनपुर के मोहम्मद शाह नामक सुल्तान ने भी इसको तोडऩे की कोशिश की थी, लेकिन इसका महत्त्व और इसका सम्मान कभी कम नहीं हुआ।

हर किसी की चिंता हरती है चिंतपूर्णी

चिंतपूर्णी मंदिर शक्तिपीठ मंदिरों में से एक है इस स्थान को हिन्दुओ के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक माना गया है। पूरे भारत मे शक्तिपीठ की संख्या 51 है इसमें से एक स्थान जहाँ सती का अंश चरण के रूप में यहाँ गिरे। शक्तिपीठ से तात्पर्य यह है कि जब माता सती के शरीर को विष्णु जी के सुदर्शन चक्र से 51 भागो में बांटा गया था उस समय जिस-जिस स्थान पर गिरे, उन्हें शक्तिपीठ का दर्जा दिया गया है। चिंतपूर्णी धाम हिमाचल प्रदेश में स्थित है उस स्थान पर प्रकृति का सुंदर नज़ारा यात्रियों का मनमोह लेता है।

सन्त निरंकारी मिशन ने मनीमाजरा के सरकारी अस्पताल को सौंपी 50 पीपीई किट

मनीमाजरा, 14  मई : आज सारा संसार करोना महामारी से लड़ रहा है। जिसमें सेहत विभाग के डाक्टर और सेहत कर्मचारियों का विशेष योगदान है जो कि सबसे आगे रहकर पूरे देश को इस महामारी से बचाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संत निरंकारी मिशन की और से चैरिटेबल फाउंडेशन के सदस्यों ने 50 पी पी ई किट अस्पताल के एसएमओ डॉ  अरूण बंसल को सौंपी ।

इलाहाबाद के इस मंदिर में लेटे हुए हैं हनुमान जी

इलाहबाद ,25 नवंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) पहला और एकमात्र मंदिर , हालाकि अब तो लेटे हनुमान जी के कई मंदिर पूरे भारत में स्‍थापित हो चुके हैं परंतु इलाहाबाद में यमुना के तट पर बना बड़े हनुमान जी का मंदिर एकमात्र सबसे प्राचीन मंदिर है जहां पवनपुत्र शयनमुद्रा में दिखाई देते हैं। इस मंदिर का महत्‍व इसलिए भी बढ़ जाता है क्‍योंकि इसका विवरण वेदव्‍यास रचित पुराणों में में भी प्राप्त होता है। इस मंदिर का एतिहासिक महत्‍व भी है।

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