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वो मुसलमान होकर भी मनाता है दीवाली, कारीगरों की करता है आरती

sanjay kumar | November 16, 2020 02:13 PM

-धार्मिक एकता व सौहार्द की मिसाल है शहजाद
-अपने होटल के कारीगरों को देता है भगवान के बराबर का दर्जा

संजय कुमार
रोहतक। वो मुस्लिम है पर लेकिन हिंदुओं और हिंदू धर्म में भी उसकी आस्था कम नहीं है। वह हिंदुओं के हर तीज-त्योहार उत्साह के साथ मनाता है। पेशे से वह होटल संचालक है। इसलिए अपने होटल में भी उसने हिंदुओं को ही कारीगर रखा है। खास बात यह है कि त्योहारों पर वह कारीगरों को रोली-चावल से तिलक करके उनकी आरती उतारता है। इस दीवाली भी उसने अपनी ओर से बनाई गई इस परम्परा का निवर्हन करते हुए अपने कारीगरों का इसी तरह से सम्मान किया। अपने होटल के कारीगरों को वह भगवान के बराबर का दर्जा देता है।

हम बात कर रहे हैं रोहतक जिला के गांव तैमूरपुर निवासी शहजाद की। अपने गांव के निकट ही गांव काहनौर मोड़ पर शहजाद होटल चलाता है। इस होटल पर उसने अपने गांव के साथ-साथ आसपास के गांव के लोगों को कारीगर के रूप में रोजगार दे रखा है। बचपन से ही हिंदू परिवारों में घुल-मिलकर उनका परिवार भी रहा है। शहजाद और उसके परिवार के अन्य सदस्यों का हिंदू परिवारों में इस तरह का भाईचारा वर्षों से कायम है। सामाजिक, धार्मिक सौहार्द के चलते ही उनका सामाजिक दायरा भी काफी बड़ा है।

 

धार्मिक सौहार्द की इससे बेहतर तस्वीर
धार्मिक सौहार्द की इससे बेहतर तस्वीर और कोई नहीं हो सकती कि उनका परिवार हिंदुओं के तीज-त्योहारों को बड़े ही चाव से मनाता है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी उन्होंने दीवाली पूरे उल्लास के साथ मनाई। साथ ही अपने होटल पर काम करने वाले कारीगरों का शहजाद ने रोली-चावल लगाकर ना केवल तिलक किया, बल्कि उनकी आरती भी की। यह सिर्फ धार्मिक एकता और सौहार्द को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि कारीगरों के मन में अपने मालिक के प्रति सच्ची निष्ठा और ईमानदारी का भाव भी पैदा करता है। सोचिये अगर हर मालिक अपने संस्थान, दुकान, शोरूम में काम करने वाले कारीगरों को इतनी इज्जत दे तो वह वफादारी के पैमाने पर 24 कैरेट सोने की तरह सदा चमकते ही मिलेंगे। उनमें कभी खोट नहीं आ सकता।

गांव में हिंदू-मुसलमानों के बीच सदा भाईचारा रहा है कायम: सरपंच
गांव तैमूरपुर के सरपंच विनोद कुमार के मुताबिक गांव में हिंदू-मुसलमानों के बीच कभी कोई भेद नजर नहीं आया। इसकी इससे बड़ी बानगी क्या होगी कि यहां वर्षों से मंदिर और मस्जिद एक ही कैंपस में बने हैं। मस्जिद में यहां अजान होती है तो मंदिर में भजन गूंजते हैं। दोनों समुदायों की आस्था के बीच में कभी कोई बात रोड़ा नहीं बनी। आज तक कभी कोई विवाद पैदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि शहजाद और उनके परिवार का गांव में मिलनसार होना यही दर्शाता है कि हम सबको धार्मिक कट्टरता से बाहर निकलकर एकता की भावना मन में पैदा करनी चाहिए। किसी भी धर्म, समुदाय से पहले हम सब इंसान हैं और इंसानियत हमारे दिलों में जिंदा रहनी चाहिए। जिस तरह से तैमूरपुर गांव में धार्मिक शांति और सामाजिक रूप से भाईचारा कायम है, यह धर्म के उन ठेकेदारों पर करारा तमाचा है, जो कि लोगों को आपस में लड़ाने का काम करता हैं।

 
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