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ज्योतिष .- तीज और विवाह, राशि अनुसार करें ये उपाय, जल्द बनेगा शादी का संयोग

वास्तव में तीज का संबंध शीघ्र विवाह से ही है. जिन लोगों की शादी नहीं हुई है या जिनकी शादी में कोई अड़चन आ रही है, तो हम आपको बता रहे हैं कुछ उपाय जिन्हें करने से आपकी शादी का संयोग जल्द से जल्द बन जाएगा.

हरियाली तीज 23 जुलाई गुरुवार

वर्तमान समय के कोरोना काल में हर व्रत, पर्व, त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान बहुत सीमित रुप से , उसके महत्व को ध्यान में रख कर , सार्वजनिक स्थानांे, धर्मस्थलों की बजाए घरों या ऑनलाइन मनाए जा रहे हैं। आप भी पूरी निष्ठा से मनाएं परंतु सभी नियमों का पालन करते हुए ताकि गलती से भी न हम संक्रमित हों न दूसरों को होने दें।

सावन के सोमवार को खरीदें इनमें से कोई भी एक चीज, होगा भाग्य उदय

भस्म:पहले सोमवार को या किसी भी सावन के सोमवार को शिव मूर्ति के साथ यदि भस्म रखते हैं तो शिव कृपा मिलेगी.

चातुर्मास इस बार 4 की बजाए - 5 मास का रहेगा।

इस वर्ष चातुर्मास जो पहली जुलाई से, 25 नवंबर तक है, चार मास की बजाए, पांच मास का रहेगा। इस चौमासे का विवरण रामायण काल में भी मिलता है जब भगवान राम, कहते हैं कि अब चौमासा भी समाप्त होने जा रहा है और सीता जी का कुछ पता नहीं चल रहा।  इस बार आश्विन मास, मलमास अर्थात अधिक मास होने से एक की बजाय दो बार आएगा और सभी उत्सव, पर्व एवं त्योहार आदि गत वर्षों की तुलना में लेट आएंगे।

देवशयनी एकादशी बुधवार, जुलाई 1, 2020 को

देवशयनी एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात्रि से ही हो जाती है. दशमी तिथि की रात्रि के भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए. अगले दिन प्रात: काल उठकर देनिक कार्यों से निवृत होकर व्रत का संकल्प करें भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर आसीन कर उनका षोडशोपचार सहित पूजन करना चाहिए।

क्या देव भी पौराणिक काल में क्वारंटाइन होते थे?

हमारे देश में भगवान भी बीमार होते हैं और उनकी भी चिकित्सा की जाती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ को ठंडे जल से स्नान कराया जाता है। इस स्नान के बाद भगवान को ज्वर (बुखार) आ जाता है। 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ को एकांत में एक विशेष कक्ष में रखा जाता है। जहां केवल उनके वैद्य और निजी सेवक ही उनके दर्शन कर सकते हैं। इसे अनवसर कहा जाता है। देवताओं का यह 4 महीने का शयनकाल,वर्तमान समय का क्वारंटाइन जैसा ही लग रहा है।
हरिशयनी एकादशी, देवशयनी एकादशी, पद्मा एकादशी, पद्मनाभा एकादशी नाम से पुकारी जाने वाली एकादशी इस वर्ष 1 जुलाई  को आ रही है। इस दिन से गृहस्थ लोगों के लिए चातुर्मास नियम प्रारंभ हो जाते हैं।

देवशयनी  से देवउठनी एकादशी के बीच नहीं होगा विवाहों का लॉकडाउन

अक्सर कई विद्वान चौमासे को लेकर आप तो चिंतित रहते ही है परंतु सारे समाज को कई बिंदुओं पर भ्रमित कर देते हैं। और आमजन पूछता रह जाता हैं कि क्या अब चार महीने के लिए शादियों का लॉक डाउन आरंभ हो रहा है? मान्यता है कि इस चतुर्मास में विष्णु भगवान क्षीर सागर में निद्रा में चले जाते हैं और पृथ्वी पर इस दौरान कोई भी धार्मिक एवं विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। इसे श्री विष्णु शयनोत्सव भी कहा जाता है।

ग्रहण का किस राशि पर क्या होगा प्रभाव बता रहे हैं मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्,

आपकी कुंडली में दी गई  चंद्र राशि के अनुसार ग्रहण का यह सामान्य फल हो सकता है, फिर भी हर व्यक्ति की  ग्रह दशा आदि के अनुसार कई अन्य फलादेश भी होंगे

1.      मेष - सफलता के संकेत-  धन लाभ का योग बन रहा है. इस राशि के लोगों के लिए सूर्यग्रहण विशेष लाभ देने वाला साबित होगा. सूर्यग्रहण किसी भी मामले में हानिकारक नहीं है बल्कि सभी 

ग्रहण में क्या करें क्या न करें

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद् के अनुसार सूतक काल में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। ग्रंथों के अनुसार सूतक काल में पूजा पाठ और देवी देवताओं की मूर्तियों को भी छूने की मनाही है। इस दौरान कोई शुभ काम शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता।
सूर्य ग्रहण के अशुभ असर से बचने के लिए प्रभावित राशि वाले लोगों को ग्रहण काल के दौरान महामृत्युंजय मंत्र के जप करना चाहिए या सुन भी सकते हैं। इसके अलावा जरुरतमंद लोगों को अनाज दान करें। ग्रहण से पहले तोडक़र रखा हुआ तुलसी पत्र ग्रहण काल के दौरान खाने से अशुभ असर नहीं होता।

शुभ फल लेकर नहीं आते ग्रहण:मदन गुप्ता

ग्रहण शुभ फल लेकर नहीं आते हैं। ये भविष्य में आने वाली परेशानियों के बारे में भी इंगित करते हैं। देशकाल की बात करें तो एक माह में दो ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं का भी कारण बनते हैं.

हैदराबाद, कोलकाता, चंडीगढ़, बंगलौर, लखनऊ, चैन्नई में दिखेगा ग्रहण

आज से 5000 साल पहले जब महाभारत के युद्ध का 14 वां दिन था, कुरुक्षेत्र के अलावा कई अन्य देशों में पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा था और दिन में ही अंधेरा छा गया था। इस दिन अर्जुन, अभिमन्यु के वध का बदला लेने की प्रतिज्ञा करते हैं। कौरव जयद्रथ को छिपा देते हैं। पूर्ण ग्रहण के कारण अंधेरा छा जाता है।  रात्रि के कारण युद्ध बंद हो जाता है  जो वास्तव में रात नहीं थी । परंतु जैसे ही ग्रहण समाप्त होता है, उजाला होता है, श्री कृष्ण अर्जुन से जयद्रथ का वध करवा देते हैं।

21 जून के इस दुर्लभ सूर्य ग्रहण से बढ़ेंगी आशंकाएं, रहना होगा हर तरफ से सचेत

रविवार 21 जून को  इस साल का पहला सूर्य ग्रहण प्रात: 9 बजकर 15 मिनट पर लगेगा और दोपहर 3 बजकर 05 मिनट तक रहेगा।यह अपने चरम पर 12:18 बजे के करीब रहेगा  .इसकी कुल समय.सीमा कुल 03 घंटे 33 मिनट रहने की संभावना है- यह वलयाकार सूर्य ग्रहण रहेगा।

ग्रहण में भूलकर भी न करें ये गलती

अगर आप ग्रहण को देखना चाहते है तो आप इसे नग्न आंखों से बिल्कुल ही न देखें. सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि सूर्य ग्रहण का बुरा प्रभाव आंखों पर पड़ता है. इसे नग्न आंखों से देखने से बचना चाहिए. नग्न आंखों से ग्रहण देखने पर आंखों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए दूरबीन, टेलीस्कोप, ऑप्टिकल कैमरा व्यूफाइंडर से सूर्य ग्रहण को देखना सुरक्षित है.

सूर्यग्रहण के दिन ये तीन राशि वाले रखें सावधानियां

सूर्य का सबसे बुरा प्रभाव वृषभ राशि पर पड़ेगा. वृषभ राशि के लोगों के लिए यह ग्रहण धन भाव में होगा. जो पॉपर्टी से जुड़े मामले है, उनसे आपका दूर रहना है. इसके दौरान आपको कर्ज लेने से बचना है. अगर जरूरत है तो भी कर्ज न लें. इस दौरान आपके दुश्मन बढ़ सकते हैं, जिसकी वजह से मानसिक तनाव में रह सकते है. दूसरा भाव वाणी का भी होता है. इस लिए सूर्य ग्रहण के दौरान अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना है. आप अनजाने में ऐसे शब्द बोल सकते हैं जो समाने वाले व्यक्ति को ठेस पहुंचा सकते हैं, इसलिए वाणी पर नियंत्रण सबसे ज्यादा जरूरी है.