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ईएमआइ के बोझ से बचाएगा रिवर्स ईएमआइ फंड का तरीका

November 26, 2017 12:28 AM

दिल्ली ,25 नवंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया )  मासिक किस्त यानी ईएमआइ वाली जिंदगी वर्तमान उपभोक्तावाद का सबसे बड़ा अभिशाप है। मासिक वेतन पाने वाले बहुत से युवा  पना वेतन खाते में आते हुए और तुरंत बाद बैंक की किस्त के नाम पर उसे जाते हुए देखते हैं। दिवाली के बाद के यह सप्ताह इस बारे में सोचने के लिए सबसे उचित है क्योंकि साल का यही वह वक्त है जब वस्तुएं खरीदने का आकर्षण सर्वाधिक होता है।

पूरा उद्योग है जो इस दिशा में भरपूर मेहनत करने में लगा है कि किस्त पर कर्ज लेने की प्रवृत्ति सामान्य और सहज हो जाए। एक वक्त था, जब कुछ भी किस्त पर लेने के लिए ढेरों कागजी कार्यवाही करनी पड़ती थी। अब इस काम में मुश्किल से कुछ मिनट का समय लगता है और एक पहचान के अलावा मुश्किल से ही किसी और दस्तावेज की जरूरत पड़ती है। सच कहें तो मिनट कहना भी ज्यादा ही है।

उदाहरण के तौर पर, अमेजन या अन्य ई-कॉमर्स वेबसाइट पर आप क्रेडिट कार्ड से की जाने वाली शॉपिंग को साथ ही ईएमआइ में बदल सकते हैं। इतना ही नहीं, एक बड़ी वित्तीय कंपनी ने तो अपना ‘ईएमआइ कार्ड’ ही जारी कर दिया है, जिसमें ईएमआइ की पूर्व निर्धारित सीमा दी जाती है। उपभोक्ता को बस उस कार्ड से खरीदारी करनी होती है और वह खुद-ब-खुद ईएमआइ में बदल जाता है। कह सकते हैं ईएमआइ पर खरीद करना कार्ड से खरीदारी करने जितना ही आसान हो गया है। खासकर अगर आप ऑनलाइन खरीद कर रहे हों।

इस सबके साथ समस्या ये है कि लोग सीमा से ज्यादा खरीदारी कर लेते हैं और ब्याज के रूप में बड़ी राशि का भुगतान करते हैं। उपभोक्ता वस्तुओं की ईएमआइ पर प्रभावी ब्याज दर बहुत ज्यादा होती है, करीब 17-20 फीसद। इस ब्याज दर को छिपाना इस तरह के लोन के लिए प्रोत्साहित करने वाले सेल्स स्टाफ के प्रशिक्षण का हिस्सा होता है। अगर आप किसी स्टोर से खरीदारी करते हैं तो आपको पूरी राशि रुपये में बताई जाती है।

सेल्स स्टाफ कुछ ऐसे कहता है, ‘आपको 11,346 रुपये एकमुश्त देने होंगे और फिर 3,876 रुपये प्रति माह की छह किस्त देनी होगी।’ इस स्थिति में लगभग सभी के लिए असल ब्याज दर की गणना कर पाना मुश्किल है। यहां तक कि अगर आपके पास उस वक्त कोई कंप्यूटर हो, तब भी। उपभोक्ता सिर्फ इस बारे में सोचता है कि कुल राशि ठीक लग रही है कि नहीं। और अगर वो थोड़ा सा भी नरम लगते हैं, तो सौदा पक्का और भारी ब्याज का बोझ उन पर पड़ जाता है।

ब्याज दरों को लेकर शिकायत का कोई औचित्य नहीं है जैसा कि ज्यादातर लोग सोशल मीडिया पर करते रहते हैं। छोटे कर्ज बैंकों व वित्तीय संस्थानों के लिए खर्चीले और जोखिम भरे होते हैं, खासकर उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में। कर्ज वापस न होने की स्थिति में बैंकों के लिए इन वस्तुओं को पुन: बेचकर कोई कीमत मिलने की संभावना नगण्य होती है। यह प्रतिस्पर्धी बाजार है और अगर कम दर की संभावना होती तो निश्चित रूप से कोई न कोई कम ब्याज दर का विकल्प दे रहा होता।

वास्तव में इस ईएमआइ संस्कृति से बचने का कोई रास्ता नहीं है। हालांकि एक विचार जरूर है इस बारे में, वो है खुद के लिए ‘रिवर्स ईएमआइ’। सिर्फ एक बार इसे आजमाइये, आप संतुष्ट हो जाएंगे। आप शॉर्ट टर्म निवेश के लिए कोई फंड पसंद कीजिए। एक इक्विटी इनकम फंड, जिसमें एक फिक्स्ड इनकम फंड जैसी ही स्थिरता होती है, लेकिन इक्विटी फंड की तुलना में इस पर टैक्स ज्यादा लगता है। रिवर्स ईएमआइ के तौर पर यह फंड अच्छा हो सकता है। इस तरह के एक फंड में एसआइपी शुरू कीजिए। इसमें ऐसी राशि का निवेश करें जो आप बतौर किस्त कहीं आसानी से भर सकते हैं। जब आपको कुछ खरीदने की जरूरत लगे, तब देखिए कि क्या आपके उसे ‘रिवर्स ईएमआइ’ फंड में पर्याप्त राशि जमा हो गई है।

अगर हां, तो वहां से पैसा निकालिए और वह सामान खरीद लीजिए। अगर नहीं, तो थोड़ा इंतजार कीजिए। इस फंड को बचत की तरह इस्तेमाल मत कीजिए। यह फंड खर्च करने के लिए है। जहां आप 17 से 20 फीसद का ब्याज दे रहे होते, इस फंड की मदद से आपको 6 से 8 फीसद तक का रिटर्न मिल जाएगा। आप यकीन नहीं कर पाएंगे लेकिन कुल मिलाकर यह अंतर 25 फीसद का हो जाता है। यह इतना बड़ा अंतर है कि आप इससे बचने वाले पैसे से कोई और ऐसी चीज खरीद सकते हैं जो सामान्य स्थिति में शायद आप नहीं खरीद पाते।

विशेष रूप से युवाओं के लिए, छोटे पैमाने पर ऐसा करना-जैसे महंगा फोन खरीदने के लिए, उन्हें इस बात का एहसास करा सकता है कि समय पैसे को कैसे प्रभावित करता है। मान लीजिए, आपके घर में कोई बच्चा है जो कोई गैजेट खरीदने के लिए जिद कर रहा है, तो उसके साथ डील कीजिए और एक रिवर्स ईएमआइ फंड शुरू कर दीजिए। उसके बाद ईएमआइ की राशि और आपके फंड से मिले रिटर्न के अंतर से उसे एक और भी बेहतर गैजेट खरीदकर दे दीजिए।

यह इस बात का बहुत अच्छा उदाहरण है कि खर्च को कुछ समय तक टालना पैसा बढ़ाता है, और समय से पहले किसी चीज पर खर्च करना पैसे को कम करता है। अपनाने के लिहाज से यह बेहद ताकतवर विचार है और जीवन में समृद्धि का कारक बन सकता है।

 
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