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मनी लाड्रिंग में जमानत होगा अब आसान

November 25, 2017 11:52 PM

नई दिल्ली,25 नवंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) । सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के लिए दो कड़ी शर्ते लगाने वाली प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 45(1) को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ये धारा संविधान में मिले समानता और जीवन व स्वतंत्रता के अधिकार का हनन करती है। पीएमएलए कानून की धारा 45(1) इस कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत देने के लिए दो शर्ते लगाती है। यह धारा कहती है कि अगर व्यक्ति शिड्यूल ए में दिए गए अपराध में तीन साल से ज्यादा की सजा का आरोपी है तो उसे जमानत देने से पहले सरकारी वकील (लोक अभियोजक) को जमानत अर्जी का विरोध करने का मौका दिया जाएगा। दूसरी शर्त थी कि लोक अभियोजक को सुनने के बाद कोर्ट को इस बात के लिए संतुष्ट होना होगा कि अभियुक्त प्रथम दृष्टया निर्दोष है और जमानत पर रिहा होने के बाद वह अपराध को अंजाम नहीं देगा। दूरगामी परिणाम वाला यह फैसला न्यायमूर्ति आरएफ नारिमन और न्यायमूर्ति एसके कौल की पीठ ने कानून की धारा 45 की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया। कोर्ट ने कानून की धारा 45(1) को रद करते हुए आदेश दिया है कि जितने लोगों की इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित है और उनकी जमानत सिर्फ इन दो आधारों पर निचली अदालत से खारिज हुई थी, उन सभी मामलों में निचली अदालत का फैसला रद किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी ऐसे मामलों को वापस निचली अदालत भेजते हुए कहा है कि अदालत उनकी याचिकाओं पर नये सिरे से विचार करेगी जैसे कि धारा 45 की वो दोनों शर्ते थी ही नहीं। अदालत उनकी जमानत अर्जी पर विचार करते समय उनकी जेल की अवधि और स्वतंत्रता के मसले को देखेगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी मामलों को जल्दी से जल्दी निपटाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 45 की दोनों शर्तो के उपबंध को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा कि ये प्रावधान अनुचित और अतार्किक और कानून के खिलाफ हैं। हालांकि सरकार ने कानून की तरफदारी करते हुए इसे बनाए रखने की अपील की थी। कोर्ट ने मामले का विश्लेषण करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति इसी कानून में आरोपी हो और उसे गिरफ्तारी से पहले जमानत मिल जाती है और पूरे मामले के ट्रायल के दौरान वह व्यक्ति जमानत पर रहता है तो कानून की यह धारा उस पर लागू नहीं होगी। लेकिन अगर वही व्यक्ति गिरफ्तार हो जाता है तो उसे धारा 45(1) की शर्तें पूरी करनी होंगी। इस भेद का कोई मतलब नहीं है।

 
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