Monday, December 11, 2017
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Chandigarh

पंचकूला हिंसा, बैकफुट पर खट्टर सरकार

October 07, 2017 08:44 PM

चंडीगढ़, 07 अक्तूबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया )। पंचकूला हिंसा के मामले में किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने से बचती रही हरियाणा सरकार ने निलंबित आईपीएस अशोक कुमार को बहाल कर दिया है। अशोक कुमार की बहाली के पीछे बड़ा कारण यही है कि सरकार पंचकूला हिंसा मामले में गृह विभाग के आला अधिकारियों पर कार्रवाई करने से बच रही है। अशोक कुमार की बहाली के बाद इस मामले को उठाने वाले आईपीएस अधिकारियों का खेमा अब शांत हो जाएगा। बीती 25 अगस्त को डेरामखी गुरमीत राम रहीम की पंचकूला कोर्ट में पेशी के बाद हुई हिंसा के बाद हुई फजीतह से बचने के लिए सरकार ने डीसीपी अशोक कुमार को निलंबित कर दिया था। शनिवार को सरकार ने अपने आदेश वापस लेते हुए अशोक कुमार को बहाल कर दिया है। 

वरिष्ठों पर न हो कार्रवाई इसलिए डीसीपी हुए बहाल
पंचकूला हिंसा के बाद सरकार ने किया था सस्पेंड
शांत होगा आईपीएस अधिकारियों का खेमा
सरकार को लिखे चेतावनी पत्र बने बहाली का आधार


सरकार ने लंबित जांच के साथ बहाली के आदेश जारी करते हुए उन्हें एचएपी अंबाला में प्रथम बटालियन का कमांडेंट नियुक्त किया है। इससे पहले अभिषेक जोरवाल के पास इस पद का अतिरिक्त कार्यभार था। सूत्रों के अनुसार पंचकूला में डेरा अनुयायियों के इकट्ठे  होने के दौरान ही अशोक कुमार द्वारा लिखे गए दो पत्रों की वजह से सरकार ने उन्हें बहाल किया है। बताते हैं कि इन पत्रों में लिखी गई कहानी कई वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकती थी। इसी वजह से सरकार ने अशोक कुमार को ही बहाल करना उचित समझा। यह पहला मौका नहीं है। इससे पूर्व पिछले वर्ष फरवरी में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भी सरकार ने ऐसा ही कुछ किया था।
पंचकूला में डीसीपी रहते हुए अशोक कुमार ने 25 अगस्त को हुई हिंसा से पहले ही पंचकूला की उपायुक्त व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखे थे। 24 अगस्त को उपायुक्त व अन्य विभागीय अधिकारियों को लिखे पत्र में उन्होंने कहा था कि पंचकूला में करीब एक लाख डेराप्रेमी जुट चुके हैं। जिन्हें नियंत्रित करने के लिए करीब 100 पैरा-मिल्ट्री कंपनियों की जरूरत है। इस पत्र में यह भी कहा गया था कि डेरा प्रेमियों को अगर बाहर नहीं किया गया तो अप्रिय घटना की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। 
अशोक कुमार को अंतिम समय तक मांग के अनुरूप न तो पैरा-मिल्ट्री की कंपनियां मिली और न ही पुलिस का बैकअप उनके पास उपलब्ध था। इसके बाद उन्होंने एक और पत्र वरिष्ठ अधिकारियों का लिखा जिसमें उन्होंने पंचकूला के अदालत परिसर, सेक्टर-एक व दो के क्षेत्रों को सर्वाधिक संवेदनशील करार देते हुए यह पूरा इलाका सेना के हवाले किए जाने की बात भी कही थी, लेकिन अशोक कुमार के इन दोनों पत्रों को अंतिम समय तक गंभीरता से नहीं लिया गया और पंचकूला में हिंसा भडक़ गई। ये पत्र मीडिया में वायरल होने के बाद से ही सरकार की फजीहत बढ़ गई थी।

 
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