Chandigarh

गावों की लाल डोरा सीमा बढ़ाएगी सरकार

October 06, 2017 07:21 PM

चंडीगढ़,06 अक्तूबर (न्यूज अपडेट इंडिया )   हरियाणा सरकार ने प्रदेश के गावों की लाल डोरा सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब साढे छह हजार गावों को लाभ मिलेगा। इसके लिए बहुत जल्द गावों की मैपिंग करवाई जाएगी। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्युु की अध्यक्षता वाली कमेटी ने कई घंटे तक चली बैठक में यह सिफारिश की है। करीब एक साल पहले वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की अध्यक्षता में बनी कमेटी की तीसरी बैठक में यह सहमति बनी है।


अभिमन्यु कमेटी ने बैठक में लिया फैसला
जल्द होगी हरियाणा के गावों की मैपिंग

कैबिनेट सब-कमेटी ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, विकास एवं पंचायत तथा टाउन एंट कंट्री प्लानिंग विभाग को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में इन तीनों ही विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा सब-कमेटी सदस्य एवं शहरी स्थानीय निकाय विभाग मंत्री कविता जैन भी मौजूद रहीं। सब-कमेटी में विकास एवं पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ व समाज कल्याण राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी भी सदस्य हैं। हालांकि वह इस बैठक में मौजूद नहीं थे। हरियाणा में गावों की लाल डोरा सीमा बढ़ाए जाने की मांग पिछली कई सरकारों के विचाराधीन रही है। इस बारे में कोई निर्णय नहीं हो सका है। भाजपा के मीडिया प्रमुख राजीव जैन ने इसके लिए सीएम को नोट लिखा था। इसी नोट के आधार पर सीएम ने कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया था। पूर्व की हुड्डा सरकार में जब गांवों में बीपीएल परिवारों को 100-100 गज के मुफ्त प्लाट दिए गए तो उस समय ही गांवों में प्लॉटों की रजिस्ट्री हुई थी। इन प्लॉटों के अलावा गांवों में बसे किसी भी ग्रामीण के पास उसकी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक नहीं है। सरकार की कोशिश है कि लालडोरा बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीणों को मालिकाना हक दिया जाए। इसके लिए सैटेलाइट के जरिये भी मैपिंग कराई जाएगी ताकि प्रॉपर्टी की पहचान करके उसकी टैगिंग की जा सके। वित्त मंत्री कै़ अभिमन्यु ने कहा, यह काम दो चरणों में होगा। पहले चरणों में गांवों के मौजूदा लालडोरे के अंदर की प्रॉपर्टी चिह्नित होगी। इसके बाद लालडोरे के बाहर के मकानों की संख्या जुटाई जाएगी। इसके बाद ही लालडोरा बढ़ाने पर फैसला होगा। उन्होंने कहा कि शहरीकृत गांवों यानी जो गांव शहरों में शामिल हो चुके हैं, उनका लालडोरा बढ़ाते हुए इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि किसी तरह का दुरुपयोग न हो। इसका कारण यह भी है कि शहरों से सटे गांवों में प्रॉपर्टी के रेट भी ज्यादा होगा। गांवों में जमीनों की रजिस्ट्री नहीं होने की वजह से अभी तक भी खरीद-फरोख्त कब्जे के आधार पर ही होती है। यानी जमीन खरीदने वाले व्यक्ति को संबंधित जमीन का कब्जा दे दिया जाता है। इसके बाद वह उस जमीन का मालिक हो जाता है। कागजों में मालिकाना हक किसी के पास भी नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने पंचायती व शामलात भूमि को भी कब्जाया हुआ है लेकिन बरसों से कब्जा होने की वजह से सरकार इसे छुड़ाने में भी असमर्थ है। ऐसे में लालडोरा बढ़ाकर इसका रास्ता निकालने की तैयारी है।

 
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