Chandigarh

सुच्चा सिंह लंगाह सिख पंथ से निष्काषित

October 05, 2017 08:11 PM
चंडीगढ़। अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने करीब पांच घंटे तक चली बैठक के बाद पंजाब के पूर्व मंत्री एवं एसजीपीसी के निवर्तमान सदस्य सुच्चा सिंह लंगाह को सिख पंथ से निषकाषित करने का हुक्मनामा जारी कर दिया है। हाल के वर्षों में किसी भी धार्मिक व सियासी प्रतिनिधि के विरूद्ध अकाल तख्त साहिब द्वारा की गई यह बड़ी कार्रवाई है।

अकाल तख्त जत्थेदार ने बैठक के बाद जारी किया हुक्मनामा 
समूचे विश्व में बसे सिखों को रोटी-बेटी का नाता खत्म करने आदेश

सुच्चा सिंह लंगाह इस समय पुलिस रिमांड पर हैं। सुच्चा सिंह लंगाह पूर्व बादल सरकार में लोक निर्माण मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में वह सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य थे। पिछले सप्ताह पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की महिला कर्मचारी ने सुच्चा सिंह लंगाह के विरूद्ध बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। गुरदासपुर पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने के बावजूद लंगाह गिरफ्तार नहीं हुए तो अदालत ने उनका लुक आउट नोटिस जारी कर दिया। इस बीच लंगाह ने शिरोमणि अकाली दल तथा एसजीपीसी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। जिसे सुखबीर बादल तथा एसजीपीसी अध्यक्ष ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया।
इस बीच आज सुबह अकाल तख्त साहिब पर जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघुवीर सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह, तख्त श्री हजूर साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलवंत सिंह के प्रतिनिधि ने भाग लिया।
इससे पहले पांचों सिंह साहिबानों ने शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी की सलाहकार समीति के साथ भी मंथन किया। सूत्रों की मानें तो बैठक में आज लिए जाने वाले फैसले के संबंध में अकाली दल सुप्रीमों प्रकाश सिंह बादल तथा अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की परोक्ष रूप से पहले ही सहमति ले ली गई थी। अकाल तख्त साहिब से आज हुए फैसले पर समूचे विश्व में बसे सिखों की नजर लगी हुई थी। लंबी बैठक के बाद अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने अकाल तख्त की प्राचरी से हुक्मनामा जारी करते हुए सुच्चा सिंह लंगाह को सिख पंथ से बाहर करने का ऐलान किया। जिस समय अकाल तख्त जत्थेदार ने यह हुक्मनामा जारी किया उस समय लंगाह की तरफ से कोई भी प्रतिनिधि या परिवार का सदस्य मौजूद नहीं था। इसके बावजूद अकाल तख्त से जारी होने वाले हुक्मनामे को सुनने के लिए भारी संख्या में सिख संगत यहां मौजूद थी।
कैसे चला लंगाह का घटनाक्रम
तिथि घटनाक्रम
29 सितंबर विजिलेंस ब्यूरो की महिला कर्मी ने लंगाह के विरूद्ध बलात्कार का मामला दर्ज कराया।
29 सितंबर आरोप लगने के बाद लंगाह ने एसजीपीसी व अकाली दल से दिया इस्तीफा
30 सितंबर लंगाह ने अदालत में सरेंडर का किया ऐलान,लेकिन नहीं आए।
02 अक्तूबर चंडीगढ़ की अदालत अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
03 अक्तूबर गुरदासपुर की अदालत ने जारी किया लुक आउट नोटिस। लंगाह ने हाईकोर्ट में लगाई अग्रिम जमानत याचिका।
04 अक्तूबर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की, लंगाह ने गुरदासपुर में किया सरैंडर।
05 अक्तूबर अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने सिख पंथ से किया बाहर।
 
अकाल तख्त जत्थेदार ने हुक्मनामे में क्या कहा।
आज अकाल तख्त साहिब सचिवालय में पांचों सिंह साहिबानों की बैठक हुई। जिसमें सुच्चा सिंह लंगाह के विरूद्ध समाचार पत्रों व इलैक्ट्रोनिक मीडिया में चली चर्चा तथा देश-विदेश से सिख संगत द्वारा लिखित व फोन के माध्यम की गई शिकायतों के बाद अकाल तख्त साहिब के आदेशानुसार शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा बनाई गई अकाल तख्त साहिब की सलाहकार समीति द्वारा दिए गए सुझाव पर विचार के बाद निर्णय लिया गया है कि विश्व भर के सिख अपने आदर्शों अथवा स्वाभिमान के लिए जाने जाते हैं। सुच्चा सिंह की इस कार्रवाई से सिख संगतों के मानों को भारी ठेस पहुंची है। लंगाह को सिख मर्यादा भंग करने का दोषी मानते हुए, मामले की गंभीरता तथा सिख संगतों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अकाल तख्त साहिब की मोहर अधिकार अधीन गुरमति जुगत अनुसार पांचों सिंह साहिबानों द्वारा इसे पंथ से बाहर किया जाता है।
समूह सिख संगत को आदेश दिया जाता है कि सुच्चा सिंह लंगाह के साथ किसी तरह का कोई संबंध न रखा जाए। बेशक लंगाह को शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी तथा शिरोमणि अकाली दल द्वारा दोषी मानते हुए सभी पदों से बर्खास्त कर दिया गया है। लेकिन अगर कोई अन्य सिख संस्था का भी वह इस समय सदस्य है तो उसे पदों से हटा दिया जाए। लंगाह का नाम लेकर किसी भी धार्मिक स्थान से अरदास न की जाए। सिंह साहिबानों ने यह भी निर्णय लिया है कि भविष्य में भी इस व्यक्ति को किसी धार्मिक संस्था की सदस्यता नहीं दी जाएगी। यहीं किसी भी व्यक्ति को पदाधिकारी बनाए जाने से पहले उस व्यक्ति के किरदार की अच्छे तरीके से जांच की जाएगी।


 
 
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