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Haryana

किसानों पर दर्ज एफआईआर तुरंत ली जाएं वापस, गिरफ्तार किसान तुरंत हों रिहा- कुमारी सैलजा

November 30, 2020 12:30 PM
 
 
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने भाजपा-जजपा सरकार से हरियाणा प्रदेश में दस हजार से ज्यादा किसानों पर दर्ज एफआईआर तुरंत वापस लेने और गिरफ्तार किसानों को तुरंत रिहा करने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि विरोधी काले कानूनों को लेकर मन की बात में की गई बातों को खोखला करार दिया है। 
उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह जी द्वारा किसानों से बातचीत के लिए जो शर्त रखी गई है, उससे साफ प्रतीत होता है कि केंद्र की भाजपा सरकार की नीयत में खोट है।
 
कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार द्वारा पहले कृषि विरोधी काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों पर ठंड में पानी की बौछार मारी गईं, किसानों पर आँसू गैस के गोले दागे गए, उनपर लाठीचार्ज किया गया। इस सरकार द्वारा किसानों पर भारी अत्याचार किए जाने के बाद अब उन्हीं पीड़ित किसानों पर एफआईआर दर्ज कर दी गई है। केंद्र की भाजपा सरकार और प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार किसानों को पूरी तरह से कुचलने पर तुली हुई है। हमारे अन्नदाता जो अपने हक के लिए इन कृषि विरोधी काले कानूनों के खिलाफ संघर्षरत हैं, उनपर एफआईआर दर्ज करना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उनसे अपराधियों जैसा बर्ताव किया जाना बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मेहनतकश किसान देश की रीढ़ है, कोई अपराधी नहीं हैं। हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार किसानों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस ले और गिरफ्तार किसानों को तुरंत रिहा करे।
 
कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा मन की बात में सिर्फ खोखली बातें की गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा मन की बात में सिर्फ किसानों का अपमान किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी जी को सिर्फ अपने पूंजीपति मित्रों का हित दिख रहा है। अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने कृषि विरोधी काले कानूनों के जरिए किसानों के हितों की बलि चढ़ा दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी देश को बताएं कि कृषि विरोधी बिल पास करने से पहले किसानों से सलाह क्यों नहीं ली गई? न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी कृषि कानून में क्यों नहीं है? किसानों पर लगातार अत्याचार क्यों किया जा रहा है? किसानों से बातचीत के लिए शर्त क्यों लगाई जा रही है?
 
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