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दसवीं के बच्चे पढ़ेंगे हरियाणा के बीबीपुर गांव से शुरू हुई बदलाव की कहानी 

July 04, 2020 11:38 AM
 
 

चंडीगढ़। हरियाणा के बीचों-बीच पडऩे वाला जींद जिले बीबीपुर गांव राष्ट्रीय फलक पर बड़ी पहचान बना चुका है। करीब नौ साल सामाजिक बदलाव की जो बयार शुरू हुई थी, वह अब पूरे देश और दुनिया में एक मॉडल बनकर सामने आई है। इस काम को कर दिखाया, बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान ने। मिशन पासिबल के तहत गांवों को शहरों के समान सुंदर बनाने से लेकर उनका डिजिटकलीकरण करने, पंचायतों को आनलाइन बनाने तथा महिला सशक्तीकरण के साथ ही बेटियों के चेहरों पर मुस्कान लाने की जो मुहिम सरपंच के नाते सुनील जागलान ने शुरू की थी, आज वह पूरे देश और दुनिया के लिए नजीर बन गई है।

दिल्ली के स्कूलों में दसवीं की वर्कबुक में शामिल हुआ चैप्टर ए विलेज नेम्ड बीबीपुर
सुनील जागलान ने शुरू किए बीबीपुर गांव सेकई अभियान 


सुनील जागलान छह जून 2010 से जनवरी 2016 तक बीबीपुर गांव के सरपंच रहे। उनकी दो बेटियां हैं। दुनिया के 70 देशों तक जागलान अपनी इस मुहिम का झंडा बुलंद कर चुके हैं। अब देश के प्राइवेट स्कूलों में दसवीं क्लास की वर्क बुक में सुनील जागलान के द्वारा किए गए कामों को प्रमुखता से पढ़ाया जाएगा।
 
दसवीं क्लास की इस वर्क बुक में सुनील जागलान के द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों, बदलाव के बड़े उदाहरण और उनके नतीजों के साथ ही बच्चों के लिए प्रेरणा के स्रोत के रूप में एक बड़ा चैप्टर दिया गया है, जिसका नाम है, ए विलेज नेम्ड बीबीपुर। स्काईपाथ नामक इस वर्क बुक की सीरिज एडीटर डीपीएस शारजाह (संयुक्त अरब अमीरात) की फाउंडर प्रिंसीपल एवं दिल्ली के संस्कृति स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल आभा सहगल हैं।
अमृता विद्यालयम दुर्गापुर की सह-प्रिंसीपल सुथापा मुखर्जी ने यह पुस्तक लिखी है। आरंभ में यह पुस्तक दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में अगस्त से आरंभ होने वाले शिक्षा सत्र में पढ़ाई जाएगी। फिर इसे देश के बाकी राज्यों में पढ़ाने की शुरुआत होगी। इस पुस्तक के सूत्रधार सुनील जागलान जब पहली बार सरपंच बने थे, तब उन्होंने मिशन पासिबल के तहत गांवों को शहरों के समान सुंदर बनाने का सपना देखा था। इसके तहत बीबीपुर में न केवल पार्क डेवलेप किए गए, बल्कि झूले लगाए गए, चौक बनाए गए और हर घर के बाहर डस्टबिन लगाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
 
सरपंच बनने के बाद 2012 में जागलान एक बेटी नंदिनी के पिता बने। तब उन्होंने महिला सशक्तीकरण खासकर बेटियों को बचाने तथा उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का अभियान शुरू किया, जो आज दुनिया में सेल्फी विद डाटर फाउंडेशन एंड कंपेन के रूप में जाना जाता है। बेटी-बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की परिकल्पना भी यहीं से पैदा हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश-विदेश में आठ बार जागलान के इस अभियान की दिल खोलकर तारीफ की है, जो अभी भी बखूबी दौड़ रहा है।
 
स्काईपाथ वर्क बुक के मुताबिक 2012 में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जाागलान ने पहली महिला ग्राम सभा और महाखाप पंचायत की, जिसमें महिलाओं ने भागेदीरी की। 2012 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की आधारभूत शुरुआत बीबीपुर से ही हुई। 2015 में केंद्र सरकार ने इसे देश भर में लागू किया। 2012 में ग्राम सचिवालय का प्रस्ताव केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय को भेजा गया, जिसे सरकार ने बाद में लागू किया। नौ जून 2015 को बीबीपुर गांव से सेल्फी विद डॉटर अभियान की शुरूआत हुई। 2016 में सेल्फी विद डॉटर एंड ट्री अभियान चला।
 
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