Haryana

हरियाणा में ढाई लाख एकड़ में किसानों ने छोड़ी धान की खेती

July 04, 2020 11:30 AM
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा धान की खेती किए जाने पर रोक लगाने का फैसला हाईकोर्ट द्वारा पलटने के बाद भी हरियाणा के किसानों में पहली बार क्रांतिकारी बदलाव हुआ है। प्रदेश में ढाई लाख एकड़ के हजारों किसानों ने धान की खेती से तौबा कर ली है। यही नहीं सरकार द्वारा भू-जल स्तर में सुधार के लिए लागू की शाफ्ट लगवाने की योजना में भी किसानों ने दिलचस्पी दिखाई है। जिसके चलते अब तक 937 किसान इसके लिए आवेदन कर चुके हैं।
हरियाणा में पिछले कई वर्षों से जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। जिसके चलते सरकार ने इस साल ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना लागू करते हुए किसानों को धान की खेती से हटाने का फैसला किया था। हालांकि हाईकोर्ट ने धान की खेती पर रोक लगाने वाले फैसले को बदल दिया परंतु सरकार को अपनी योजना में खासा लाभ मिल रहा है।

अब मक्का,दलहन व तिलहन पर रहेगा फोकस
प्रदेश के साढे नो सौ किसानों ने शाफ्ट लगवाने को आवेदन
भू-जल स्तर ऊंचा उठाने को सरकार की नई योजना


सरकार ने इस साल एक लाख हैक्टेयर में धान की पैदावार कम करने का लक्ष्य रखा था लेकिन भू-जल स्तर कम वाले क्षेत्रों में खुद सीएम ने दौरा किया और किसानों से बातचीत की। परिणाम स्वरूप इस धान की रोपाई में करीब ढाई लाख एकड़ की कमी आई है। भूमिगत जल रिचार्जिंग के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नई योजना को किसानों ने हाथों-हाथ लिया है। सरकार ने राज्य में 1000 रिचार्जिंग शाफ्ट लगाने टारगेट तय किया। बड़ी बात यह है कि अभी तक 937 किसान शाफ्ट के लिए आवेदन कर चुके हैं। यह योजना उन एरिया के लिए है, जहां का भूजल स्तर काफी नीचे जा चुका है। सरकार अपना टारगेट करीब-करीब पूरा कर चुका है। यह संख्या अभी और भी बढ़ेगी। ऑनलाइन पोर्टल खुला हुआ है और किसान आवेदन कर सकते हैं। हरियाणा के कुछ एरिया में भूमिगत जलस्तर 20.71 मीटर तक नीचे जा चुका है। 1974 से 2019 तक हरियाणा में भू-जल स्तर 10.65 मीटर नीचे गया है।
सीजन 2019 जून से अक्टूबर तक 0.23 मीटर पानी में सुधार हुआ है और यह इस अवधि में नीचे की बजाए ऊपर आया है। ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के तहत एक लाख हैक्टेयर यानी ढाई लाख एकड़ किसानों ने धान की बजाय दूसरी खेती करने का मन बनाया है। ये कपास, बाजरा, मक्का, ज्वार व दलहन-तिलहन आदि की खेती करेंगे। अबकी बार प्रदेश में मानसून सीजन में 107 फीसदी बरसात होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में 450 से 500 एमएम बरसात हो सकती है। इसमें मानसून सीजन यानी पहली जून से दो जुलाई तक प्रदेश में करीब 48 एमएम बरसात हो चुकी है। इससे भू-जल स्तर बढऩे में काफी हद तक मदद मिलेगी।
कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल के अनुसार जो किसान अभी जब रिचार्जिंग शाफ्ट के लिए आवेदन कर चुके हैं, उनके खेतों में शाफ्ट लगाने की प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जाएगी। सिंचाई विभाग को जल्द टेंडर के लिए कहा गया है ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सेक। इसी मानसून सीजन में इसे सिरे चढ़ाने की कोशिश है ताकि बारिश के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाया जा सके।

 
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