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माइक पेंस से नहीं मिलेंगे महमूद अब्बास

December 10, 2017 11:54 PM

काइरो,10  दिसंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया )  : शांति प्रयासों के लिए पूर्व निर्धारित दौरे पर आ रहे अमेरिकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस से फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास नहीं मिलेंगे। फलस्तीनी राष्ट्रपति ने यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यरुशलम में राजधानी स्थानांतरित करने के फैसले के विरोध में लिया है। ट्रंप के फैसले के विरोध में वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी, यरुशलम और बेरूत सहित कई मुस्लिम देशों में प्रदर्शन जारी हैं।
 

 फलस्तीन के कब्जे वाले वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में इजरायली कार्रवाई में अभी तक पांच लोग मारे जा चुके हैं जबकि दो सौ से ज्यादा के घायल होने की खबर है। यरुशलम को लेकर अमेरिका के फैसले का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार को लेबनान की राजधानी बेरूत में स्थित अमेरिकी दूतावास के समक्ष उग्र प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को पानी की बौछार करनी पड़ी और आंसू गैस छोड़नी पड़ी। शनिवार रात काइरो में हुई अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप से अपने फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया गया।

आशंका जताई गई कि फैसला रद न हुआ तो पूरे क्षेत्र में अशांति पैदा हो जाएगी। बैठक में ट्रंप के निर्णय को अंतरराष्ट्रीय कानून के खतरनाक उल्लंघन की संज्ञा दी गई। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के ऐतिहासिक फैसले की सभी निंदा कर रहे हैं लेकिन गाजा पट्टी से इजरायल पर किए गए रॉकेट हमलों पर कोई कुछ नहीं बोल रहा। यह लोगों की सोच के बारे में बता रहा है। नेतन्याहू का इशारा यूरोप की तरफ था। ट्रंप के फैसले में पूरे यरुशलम को इजरायल की राजधानी माना गया है जबकि ज्यादातर देश शहर के पूर्वी हिस्से को जबरन कब्जे वाला मानते हैं। सन 1967 के युद्ध में इजरायल ने यरुशलम के इस हिस्से पर कब्जा कर लिया था। फलस्तीन इस पूर्वी हिस्से को अपनी राजधानी बनाना चाहता है। इसी मकसद से वह शांति वार्ता में भाग लेता रहा है। इसी शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी उप राष्ट्रपति पेंस इलाके में पहुंचने वाले हैं।

ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया में पूर्ण शांति का पक्षधर है। इसीलिए यरुशलम को इजरायल की राजधानी बनाने के फैसले पर मुहर लगाई गई। फलस्तीन के विदेश मंत्री रियाद अल-मलीकी ने कहा है कि विवाद में मध्यस्थता के लिए अब उनके देश को नया व्यक्ति और देश चाहिए। मलीकी ने ही महमूद अब्बास के माइक पेंस से न मिलने की जानकारी दी है।

 
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