Chandigarh

कोर्ट मित्र ने याचिका के खिलाफ जजमेंट की पेश

December 08, 2017 03:08 PM

चंडीगढ़ ,07 दिसंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) : चंडीगढ़ के लिए लोकायुक्त की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने के दौरान पंजाब की एडिशनल एडवोकेट रफीजा हकीम जो इस मामले में कोर्ट मित्र हैं, ने कोर्ट को बताया कि यह याचिका आधारहीन है। उन्होंने कुछ जजमेंट का हवाला देकर कोर्ट को बताया कि यूटी में लोकायुक्त का कोई प्रावधान नहीं हैं। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को जजमेंट को स्टडी कर उस पर जवाब दायर करने का समय देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। इस मामले में हाईकोर्ट के वकील एचसी अरोड़ा ने चंडीगढ़ में लोकायुक्त को नियुक्त करने की मांग की है। याचिका में अरोड़ा ने कहा कि हरियाणा, पंजाब में लोकायुक्त की नियुक्ति सरकारों ने की हुई है। लोकपाल एक्ट 2014 के तहत हर राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति जरूरी है। चंडीगढ़ हरियाणा व पंजाब दोनों राज्यों की राजधानी है, लेकिन इस एक्ट के तहत केंद्रीय शासित प्रदेश में लोकायुक्त का प्रावधान न होने के चलते चंडीगढ़ में लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की गई। यह यहां के लोगों के साथ अन्याय है।

अधिकारी मर्जी से करते हैं शक्ति का प्रयोग

चंडीगढ़ में हरियाणा, पंजाब या केंद्र से अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर आते हैं। वो अपनी मर्जी से अपनी शक्ति का प्रयोग करते हैं। उनके खिलाफ शिकायत सुनने के लिए कोई उचित प्लेटफार्म नहीं है। जिस कारण इन अधिकारियों के अनुचित काम पर रोक लगाना संभव नहीं है। ये अधिकारी चंडीगढ़ में एक तय समय के लिए आते हैं और मनमर्जी से काम करते हैं। ऐसे में इन अधिकारियों की तानाशाही और गैर कानूनी गतिविधि पर रोक के लिए लोकायुक्त का होना जरूरी है। याचिका में केंद्र, हरियाणा व पंजाब को प्रतिवादी बनाते हुए चंडीगढ़ में लोकायुक्त नियुक्त करने की मांग की गई।

 
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